शुक्रवार, 3 मार्च 2017

हाँ तुम कर सकते हो

हाँ तुम कर सकते हो,
असंभव नहीं कुछ भी यहाँ,
माँझी ने भी तो किया असंभव को संभव है,
हाँ तुम कर सकते हो,
देख ऊंचाई को हार मत मानो तुम,
ऊंचाई पर चढ़ने का राह निकालो तुम,
अभी तो राह शुरू हुई है, बढ़ते चलो-बढ़ते चलो,
थक कर मत बैठो तुम, हार मत मानो तुम,
जीवन का नाम संघर्ष है,
संघर्ष करते चलो बढ़ते चलो-बढ़ते चलो,
राह कठिन है पर मंजिल सुखदाई होता है,
गम के बाद ही तो सुख का अगुवाई होता है,
संघर्ष करते चलो बढ़ते चलो-बढ़ते चलो,
हाँ तुम कर सकते हो,
असंभव नहीं कुछ भी यहाँ,
- ऋषिकान्त भगत..✍

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